जैविक सहक्रियात्मकता (सिन्बायोटिक्स)


स्वास्थ्य के प्रति निरंतर बढ़ती जागरुकता के चलते जहाँ एक ओर बाजार में पेट को स्वस्थ रखने के लिए प्रोबायोटिक उत्पाद (खाद्य पदार्थ जिसमें जीवित जीवाणु या सूक्ष्मजीव शामिल हों) जैसे स्वादिष्ट दही, योगर्ट (दुग्ध-उत्पाद जो दूध के जीवाण्विक किण्वन के द्वारा बनाया जाता है) तथा विभिन्न पेय के साथ ही प्रीबायोटिक (एक गैर-पाचक खाद्य घटक जो अंतड़ियों में फायदेमंद सूक्ष्मजीवों के विकास को बढ़ावा देता है) उत्पादों की भरमार है, वहीं प्रीबायोटिक्स तथा प्रोबायोटिक्स के सहक्रियात्मक संयोजन ने स्वास्थ्य को लेकर अति जागरूक लोगों व स्वास्थ्य बाजार की दिलचस्पी अपनी ओर केंद्रित कर ली है।

जैविक सहक्रियात्मकता (सिन्बायोटिक्स) प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स का एक ऐसा संयोजन है जिसमें सहक्रियाशील प्रभाव से रोगजनक जीवाणुओं के विकास को रोकते व अंतड़ियों में लाभकारी जीवों के विकास को प्रोत्साहित करते हैं|

जैविक सहक्रियात्मकता (सिन्बायोटिक्स ) क्यों?

जैविक सहक्रियात्मकता को समझने के लिए कि हमें पहले हमारे शरीर में प्रोबायोटिक्स तथा प्रीबायोटिक्स की भूमिका को समझना होगा।

प्रोबायोटिक्स - वहलाभकारी जीवाणु, जो हमारे पेट को स्वस्थ रखते हैं जैसे दही, किमची, कोम्बुचा आदि|

प्रोबायोटिक्स के  कार्य :

  • दस्त निवारण
  • कब्ज निवारण
  • जीवाणुरोधक गुण
  • सूजन विरोधक गुण
  • रोग प्रतिरक्षा में सुधार
  • पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता (बायोअवेलेबलिटी)
  • कैंसर, प्रत्यूर्जता (एलर्जी), एड्स3, श्वसन और मूत्र पथ के संक्रमण, आईबीडी, आईबीएस, क्रोहन रोग इत्यादि के लक्षणों का निवारण करना|

प्रीबायोटिक्स - यहप्रोबायोटिक्स या हमारे अंतड़ियों में रहने वाले जीवाणुओं का भोजन अथवा सब्सट्रेट है| उदाहरणार्थ इनुलिन, केला, प्याज, अलसी का बीज, फलियां जैसे काबुली चना, लाल राजमा आदि।

प्रीबायोटिक्स के  कार्य :

  • वसा की मात्रा कम और आयतन ज़्यादा होने के कारण भूख से संतुष्टि प्रदान करते हैं जिसके फलस्वरूप यह वजन घटाने में सहायक हैं।
  • खनिज पदार्थो जैसे कैल्शियम के अवशोषण में वृद्धि करता है जिसके फलस्वरूप अस्थि खनिज घनत्व (बोन मिनरल डेंसिटी) बेहतर होता है|
  • कब्ज कानिवारण करता है व मलत्याग में मदद करता है।

प्रोबायोटिक्स तथा प्रीबायोटिक्स को एकाकी रूप से इस्तेमाल करने के नुक़सान

  • प्रीबायोटिक्स की जीवन लघुता - पेट मे मौजूद उच्च अम्लीय स्तर में प्रीबायोटिक्स की उत्तरजीविता की संभावना बहुत कम हो जाती है। साथ ही हमारी अंतड़ियों में होने वाली एंजाइम (पाचकरस सम्बन्धी) प्रतिक्रियाएँ भी प्रीबायोटिक्स को निष्क्रिय कर देती है| प्रोबायोटिक के साथ प्रीबायोटिक्स का संयोजन प्रीबायोटिक्स को अंतड़ियों के प्रतिकूल वातावरण के प्रति सहिष्णुता प्रदान करता है|
  • सभी फाइबर प्रीबायोटिक के रूप में कार्य नहीं करते - अंतड़ियों में प्रोबायोटिक गतिविधि पर विभिन्न तंतुओं के प्रभाव को खोजने के लिए किए गए एक अध्ययन में, स्वस्थ कुत्तों को चुकंदर का गूदा, सेल्यूलोज और एफओएस (फ्रुक्टो-ओलिगोसेकेराइड जैसे प्याज, केला, शतावरी) दिया गया। अध्ययन में पाया गया है कि अंतड़ियों में जीवाणुओं की संख्या सबसे अधिक एफओएस और सबसे कम सेल्यूलोज़ की वजह से होती है। चुकंदर के गूदे का मान सेल्यूलोज और एफओएस १ के बीच में आता है।
  • उपभेदों में अंतर - हमारी अंतड़ियों में जीवाणुओं के लाखों प्रकार के उपभेद हैं। प्रत्येक प्रीबायोटिक का अलग-अलग उपभेदों पर अपना अलग प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऐसे प्री और प्रोबायोटिक जो एक दूसरे से तालमेल में हैं, उनका संयोजन अधिक प्रभावशाली लाभ प्रदान करता है।

सिन्बायोटिक पूरक के उपयोग से लाभ

  • यह अंतड़ियों में लाभकारी सूक्ष्मजीवों के विकास के साथ ही हानिकारक रोगजनकों को निकालने में मदद करता है।
  • अंतड़ियों में क्षय प्रक्रिया की रोक-थाम करके, कब्ज और दस्त का निवारण करता है।
  • यह कैंसर रोधक, प्रत्यूर्जता (एलर्जी) रोधक व जीवाणु रोधक है|
  • यह प्रोबायोटिक के उत्तरजीविता दर को अधिक प्रभावी बनाता है व अंतड़ियों में पहले से मौजूद प्रोबायोटिक को तीव्रता से बढ़ाने में मदद करता है|
  • सिरोसिस से पीड़ित रोगियों की लिवर क्षमता को बढ़ाता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • रक्त में रक्तवसा (कोलेस्ट्रॉल) के स्तर और रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।
  • हाल ही में किए गए अध्ययन में उन शिशुओं में सेप्सिस की रोकथाम को भी इंगित किया गया है जिन्हें सिनबायोटिक्स दिया गया था। सेप्सिस को रोकने के अलावा, सिनबायोटिक ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया (८२ प्रतिशत), ग्राम-नकारात्मक बैक्टीरिया (७५ प्रतिशत) तथा निमोनिया और अन्य वायु-संबंधी संक्रमण (३४ प्रतिशत) से संक्रमण के जोखिम को कम करता है।

हमारे आहार में सिनबायोटिक्स को कैसे शामिल करें?

हम सिनबायोटिक्स या तो आहार से या व्यावसायिक उत्पादों के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।

१. आहार - जैसे कि चर्चा की जा चुकी है, हमारे आहार में कई प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स होते हैं। दोनों का संयोजन एक सिनबायोटिक प्रभाव दे सकता है जिससे हमें आवश्यक स्वास्थ्यलाभ मिल सकता है। ऐसे ही कुछ संभावित संयोजन निम्नलिखित हैं:

  • ओट्स पाउडर (प्रीबायोटिक) और छाछ (प्रोबायोटिक) के साथ समुद्री नमक और मसालों का संयोजन।
  • एक कप दही में कटा हुआ केला और स्वाद के लिए थोड़ा सा शहद।
  • पत्तियों, शतावरी (एस्परागस) और किमची से बने सलाद के ऊपर शहद, नींबू, काली मिर्च और समुद्री नमक का इस्तेमाल। इस पर कद्दू के बीज और मेवे आदि का छिड़काव स्वाद व पोषकता को और भी बढ़ा देता है।
  • प्याज-लहसुन की चटनी के साथ इडली।
  • प्याज, लीक और शतावरी के साथ मिसो सूप।

२.वाणिज्यिक उत्पाद - कई सिन्बायोटिक उत्पाद व्यावसायिक रूप में बाज़ार में उपलब्ध हैं, किन्तु इन उत्पादों की प्रभावशीलता और इनके सुरक्षा पहलुओं पर कोई नियमन नहीं है।

एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और किण्वित खाद्य पदार्थों से भरपूर आहार स्वस्थ अंतड़ियों के लिए आवश्यक सिनबायोटिक्स देने में परिपूर्ण हैं। हालाँकि, गैस्ट्रिक असामान्यताएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए, बाज़ार में उपलब्ध उपयुक्त उत्पाद पर जानकारी लेने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

References

1 (Nutritional Strategies in Gastrointestinal Disease In Canine and Feline Gastroenterology, 2013)

2 (Panigrahi P, Parida S, Nanda NC, et al. A randomized synbiotic trial to prevent sepsis among infants in rural India. Nature. 2017. doi: 10.1038/nature23480)

3 https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5490594/


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