अश्वगंधा


 

आयुर्वेदिक औषधियों में अश्वगंधा एक अति महत्वपूर्ण वनस्पति है। स्वास्थ्य संबंधी अनेक लाभकारी गुणों के कारण अश्वगंधा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी कई उत्पादों का एक लोकप्रिय संघटक बन चुका है फिर चाहे वो चाय का कोई ब्राॅंड हो या केशो के लिए कोई पोषक तेल।

 

अश्वगंधा का पौधा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में, ३००० से भी अधिक वर्षों से विभिन्न औषधियो में रसायन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। अश्वगंधा, ‘अश्व’ और ‘गंध’ शब्दों के संयोजन से बना है। और जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इसकी जड़ों से घोड़े के जैसी गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है|

 

 

लाभकारी एवं प्रभावोत्पादक गुण

चिंता निवारक प्रभाव व मानसिक स्वास्थ्य

ऐसा माना जाता है कि अश्वगंधा शरीर में तनाव हार्मोन, “कोर्टिसोल” की उत्पत्ति पर रोक लगा देता है जो कि अत्यधिक चिंता की समस्या को कम करने में लाभदायक है| एक अध्ययन के अनुसार,  अश्वगंधा के शरीर पर होने वाले शांतिदायक प्रभावों के कारण, इसके निद्रा संबंधी परेशानियां या अनिद्रा से पीड़ित लोगों पर अत्यंत लाभकारी परिणाम पाए गए है।

आयुर्वेद में अश्वगंधा को मानसिक क्रियाओं के लिए एक शांतिदायक औषधि (तंत्रिका टॉनिक) के रूप में वर्णित किया गया है।

इसका उपयोग अल्ज़ाइमर (भूलने की बीमारी), पार्किंसंस (केन्द्रीय मस्तिष्क का एक रोग जिसमें रोगी के शारीरिक अंगो में कंपन होता है), हंटिंगटन रोग (एक प्रकार का आनुवंशिक रोग, जो मस्तिष्क से संबंधित हैं) और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों (मानसिक कोशिकाओ के क्षतिग्रस्त होने के कारण होने वाले रोग) के उपचार के लिए किया गया है।

यह उपयोगकर्ताओं को रोग दूर करने की योग्यता, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि तथा दीर्घायु प्रदान करता है|

संज्ञानात्मक क्षमता और स्मृति में सुधार

हाल ही में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार अश्वगंधा एमसीआई (मृदु संज्ञानात्मक हानि) से ग्रस्त लोगों की तत्कालीन स्मरणशक्ति व सामान्य स्मरणशक्ति दोनों को बढ़ाने में प्रभावशाली होने के साथ-साथ कार्यकारिणी शक्ति, ध्यान और सूचना प्रसंस्करण की गति में सुधारक सिद्ध हुआ है| अश्वगंधा के उपयोग से बुजुर्ग जनसंख्या में भी अल्जाइमर के लक्षणों में सुधार देखा गया है।

कैंसर विरोधक (एंटीकैंसर) गुण

पशुओं पर किए गए कई अध्ययनों से यह जानकारी उभर कर आती है एंटीऑक्सिडेंट (ऑक्सीकारक अणु विरोधक) और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होने के फलस्वरूप अश्वगंधा में कैंसर रोधक गुण भी होते है|

अश्वगंधा के कैंसर विरोधी गुण न केवल इसकी जड़ो के अर्क में, बल्कि पत्तियों के अर्क में भी देखे गये हैं, जो कि पौधे के बाकी भागो के अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल किया जाता है।

मांसपेशियों की मजबूती के लिए

चूहों पर किए गए अध्ययन से प्राप्त जानकारी के अनुसार अश्वगंधा मांसपेशियों को तंदुरुस्ती प्रदान करने में लाभकारी है। अध्ययन के मुताबिक, नियंत्रित पशुओं की तुलना में अश्वगंधा उपचारित पशुओं में तैराकी के समय की अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि दिखी गई है|

अश्वगंधा में सूजन विरोधक गुण पाए जाते है जो गठिया के कुछ प्रकार, विशेषत: संधिशोथ (रहूमटॉइड आर्थराइटिस - अस्थियों की सूजन के कारण होने वाला दर्द और जकड़न) के उपचार में प्रभावशाली होने के लिए जाना जाता है|

अश्वगंधा के अन्य लाभ

  • अंडरएक्टिव थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म) के लिए

अश्वगंधा हाशिमोटो रोग या हाइपोथायरायडिज्म (ऐसी अवस्था जिसमें थाइरॉइड ग्रंथि, पर्याप्त मात्रा में थाइरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती) से पीड़ित लोगों के निष्क्रिय थायराइड को उत्तेजित करने में सहायता प्रदान करता है।

  • मधुमेह विरोधी प्रभाव

मधुमेह से ग्रसित चूहों पर किए गए एक अध्ययन में अश्वगंधा के पाये गए सकारात्मक परिणामों के अनुसार अश्वगंधा की जड़ो व पत्तियों दोनों का अर्क रक्त में शुगर के स्तर को कम करने में लाभदायक है|

  • प्रजनन समस्याओं में सहायक

आयुर्वेदिक चिकित्सा में, अश्वगंधा का उपयोग प्राकृतिक कामोद्दीपक (अफ्रोदिसिअक) औषधि के रूप में किया जाता है जो यौन दुष्क्रियता में सुधार करने में मदद्कारी है। अश्वगंधा का उपयोग पुरुष प्रजननहाॅर्मोन (टेस्टोस्टेरोन) के स्तर को बढ़ाने और पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार करने हेतु भी किया जाता है।

  • भोजन की पोशकता में सुधारक

अश्वगंधा में सूजन विरोधक व अवसाद विरोधक गुण मौजूद होते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि इन्हीं गुणों के कारण जब अश्वगंधा को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर, बने बनाए खाद्य-पदार्थ जैसे लड्डू , आइसक्रीम, बिस्कुट व चाय पाउडर इत्यादि में उपयोग करने से भोजन लंबे समय तक खराब नहीं होता, साथ ही अधिक लाभप्रद भी हो जाता है|

 

प्रतिकूल प्रभाव व विपरीत संकेत

अश्वगंधा के उपयोग से होने वाले कोई भी दुष्प्रभाव अभी तक नहीं देखे गए हैं। हालांकि गर्भवती महिलाओं को अश्वगंधा की जड़ी बूटी का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसके सेवन से शिशु का अपरिपक्व (समय से पूर्व)  जन्म हो सकता है|

 

उपयोग व अनुशंसित खुराक

  • ५ ग्राम से कम अश्वगंधा पाउडर + १०० मिलीलीटर दूध + थोड़ा सा गाय का घी - यह मिश्रण सहनशीलता बढ़ाने में, शरीर को पोषण प्रदान करने में , कामोत्तेजना(अफ्रोदिसिअक) औषधि के रूप में गुणकारी है तथा इसे कुपोषित बच्चों के लिए भी लाभदायक माना जाता है।
  • २५०-५०० मिलीग्राम पानी के साथ, दिन में २-३ बार सेवन करने से, यह तंत्रिकाओ को शांत कर, एक अवसाद विरोधक (एंटीडिप्रेसेंट) के रूप में कार्य करता है व मधुमेह के रोगियों में रक्त में शुगर के स्तर को कम करने में भी सहयोगी होता है।
  • अश्वगंधा का पेस्ट जोड़ों में होने वाली सूजन के इलाज के लिए उपयोगी है।
  • अश्वगंधा सिद्ध तेलम - सामान्य शारीरिक कमजोरी के लिए तथा संधिशोथ (रहूमटॉइड आर्थराइटिस) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

 

अत: किए गए विभिन्न अनुसंधानों के तार्किक और वैज्ञानिक आधार पर यह स्पष्ट है कि अश्वगंधा के पारंपरिक उपयोग से कई लाभदायक प्रभाव प्राप्त होते हैं| भले ही अश्वगंधा के स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ हैं, परंतु इसके सेवन से पूर्व किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से दवा की खुराक व दवा के सेवन की अवधि से संबंधित सलाह लेना सदैव हितकर है।

 

References

1Medicine (Baltimore). 2018 Jun; 97(26): e11299.

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4 http://www.ayurlog.com/index.php/ayurlog/article/view/222

5 http://www.homesciencejournal.com/archives/2016/vol2issue3/Part

6https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4899165/

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